Sensex Crash Jan 13 2026: Trump Tariff Threat & Bloomberg Bond Delay Hits India Market

Sensex Crash Jan 13 2026: Trump Tariff Threat & Bloomberg Bond Delay Hits India Market

ब्लैक ट्यूसडे: भारतीय बाजार पर दोहरी मार, निवेशकों के करोड़ों स्वाहा

आज, 13 जनवरी 2026 को भारतीय शेयर बाजार (Stock Market) और अर्थव्यवस्था के लिए एक ‘ब्लैक ट्यूसडे’ साबित हुआ है। Sensex और Nifty में भारी गिरावट दर्ज की गई है, जिसके पीछे अमेरिका से आई दो बुरी खबरें मुख्य कारण हैं। बाजार खुलते ही निवेशकों में अफरा-तफरी मच गई और BSE Sensex 250 अंकों से ज्यादा टूटकर 83,627 के स्तर पर बंद हुआ।

ट्रंप का ‘टैरिफ बम’ और 75% टैक्स का डर

बाजार में सबसे बड़ा भूचाल अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के एक बयान से आया है। ट्रंप ने चेतावनी दी है कि जो देश ईरान (Iran) के साथ व्यापार जारी रखेंगे, उन पर 25% का अतिरिक्त टैरिफ लगाया जाएगा।

विशेषज्ञों का कहना है कि चूंकि भारत ईरान का एक प्रमुख व्यापारिक साझेदार है, इसलिए यह चेतावनी सीधा भारत पर असर डाल सकती है। बाजार में यह डर है कि अगर पुराने शुल्कों में यह नया टैरिफ जुड़ गया, तो भारतीय सामानों पर प्रभावी टैक्स बोझ 75% तक पहुंच सकता है। इस खबर ने मेटल और ऑयल सेक्टर के शेयरों को धराशायी कर दिया।

ब्लूमबर्ग का बड़ा झटका: बॉन्ड इंडेक्स में शामिल नहीं होगा भारत

दूसरी बड़ी बुरी खबर Bloomberg की तरफ से आई है। ब्लूमबर्ग ने भारतीय सरकारी बॉन्ड्स (Indian Government Bonds) को अपने ग्लोबल इंडेक्स में शामिल करने का फैसला 2026 के मध्य तक टाल दिया है।

ब्लूमबर्ग ने इसके लिए ‘ऑपरेशनल समस्याओं’ (Operational Issues) का हवाला दिया है। इस फैसले से भारत में विदेशी निवेश (FII Inflows) की उम्मीदों को करारा झटका लगा है, जिससे रुपया कमजोर होकर 90.16 प्रति डॉलर के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया है।

रिलायंस और अडानी के शेयरों में हलचल

इस गिरावट के बीच Reliance Industries के शेयरों में भी 2% तक की गिरावट देखी गई, जबकि Adani Group के शेयरों में मिला-जुला असर रहा। जहां एक तरफ अडानी ग्रुप ने Embraer के साथ मिलकर विमान निर्माण (Aircraft Manufacturing) में उतरने का ऐलान किया है, वहीं बाजार के नेगेटिव सेंटिमेंट ने इस अच्छी खबर को भी दबा दिया।

बाजार विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले कुछ दिन भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बेहद नाजुक हो सकते हैं, क्योंकि निवेशक अब ट्रंप प्रशासन के अगले कदम का इंतजार कर रहे हैं।

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