आज की तारीख, 21 जनवरी 2026, एक आम दिन नहीं है। अगर वक्त के पहिये ने वो दर्दनाक मोड़ न लिया होता, तो आज हम और आप मिलकर Sushant Singh Rajput का 40वां जन्मदिन मना रहे होते। सुशांत सिंह राजपूत—ये सिर्फ एक नाम नहीं, बल्कि एक ऐसा अहसास है जो पिछले 5-6 सालों में भारतीय सिनेमा प्रेमियों के दिलों में घर कर गया है। आज जब हम उन्हें याद करते हैं, तो आंखों में नमी जरूर आती है, लेकिन होठों पर वो मुस्कान भी तैर जाती है जो ‘छिछोरे’ के अन्नी या ‘धोनी’ के माही को देखकर आती थी।
पटना की गलियों से चाँद के ख्वाब तक
बिहार के पटना में जन्मे एक साधारण लड़के का सफरनामा किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं था। लेकिन Sushant Singh Rajput ने साबित किया कि अगर इरादे पक्के हों, तो आसमान का कद भी छोटा पड़ जाता है। इंजीनियरिंग की पढ़ाई छोड़कर सपनों की नगरी मुंबई आना कोई आसान फैसला नहीं था। वो भीड़ का हिस्सा बनने नहीं आए थे, वो भीड़ से अलग दिखने आए थे।
टेलीविजन पर ‘पवित्र रिश्ता’ के मानव के रूप में उन्होंने हर घर में अपनी जगह बनाई। उस वक्त किसी ने सोचा भी नहीं था कि टीवी का ये शांत सा लड़का एक दिन बॉलीवुड के बड़े-बड़े दिग्गजों को अपनी एक्टिंग का लोहा मनवाएगा। सुशांत उन चुनिंदा अभिनेताओं में से थे जिन्होंने टीवी से फिल्मों तक का सफर इतनी खूबसूरती से तय किया कि ‘कााइ पो चे’ की पहली झलक में ही दुनिया समझ गई थी—ये लड़का लंबी रेस का घोड़ा है।
सिर्फ एक एक्टर नहीं, एक जीनियस दिमाग
अक्सर बॉलीवुड स्टार्स की बातें उनकी फिल्मों, बॉक्स ऑफिस कलेक्शन या गॉसिप तक सीमित रहती हैं। लेकिन Sushant Singh Rajput इस दायरे से बहुत बाहर थे। वो सिर्फ एक बेहतरीन कलाकार नहीं थे, बल्कि एक जिज्ञासु इंसान थे। उन्हें क्वांटम फिजिक्स से प्यार था, वो तारों को घंटों निहारा करते थे और अपनी दूरबीन (Telescope) के जरिए ब्रह्मांड के रहस्यों को सुलझाने की कोशिश करते थे।
शायद ही कोई ऐसा एक्टर होगा जो शूटिंग के बीच में समय निकालकर किताबें पढ़ता हो या NASA जाने के सपने देखता हो। उनकी ’50 Dreams’ की लिस्ट आज भी इंटरनेट पर वायरल होती है, जो हमें याद दिलाती है कि जिंदगी सिर्फ सांस लेने का नाम नहीं, बल्कि सपनों को जीने का नाम है। चाहे वो प्लेन उड़ाना हो, या बाएं हाथ से क्रिकेट खेलना सीखना—सुशांत ने हर वो चीज की जो उन्हें जिंदादिली का अहसास कराती थी।
| पूरा नाम | सुशांत सिंह राजपूत (SSR) |
| जन्म तिथि | 21 जनवरी 1986 |
| जन्म स्थान | पटना, बिहार |
| प्रमुख फिल्में | MS Dhoni: The Untold Story, Chhichhore, Kedarnath, Kai Po Che, Sonchiriya |
| आखिरी फिल्म | Dil Bechara (2020) |
| शौक | एस्ट्रोनॉमी, गिटार बजाना, कोडिंग, किताबें पढ़ना |
‘एम.एस. धोनी’ और ‘छिछोरे’: अभिनय की पराकाष्ठा
जब Sushant Singh Rajput ने एम.एस. धोनी की बायोपिक में काम किया, तो लगा ही नहीं कि वो अभिनय कर रहे हैं। हेलीकॉप्टर शॉट से लेकर धोनी के चलने के अंदाज तक, उन्होंने खुद को किरदार में इस कदर ढाल लिया था कि स्क्रीन पर सुशांत नहीं, बल्कि साक्षात माही नजर आ रहे थे।
वहीं, फिल्म ‘छिछोरे’ में उन्होंने हमें सिखाया कि “सक्सेस के बाद का प्लान सबके पास है, लेकिन गलती से फेल हो गए तो उससे कैसे डील करना है, ये कोई बात ही नहीं करना चाहता।” विडंबना देखिए, जो इंसान हमें जिंदगी से हार न मानने का पाठ पढ़ा गया, वो खुद जिंदगी की पहेली में उलझ कर चला गया। लेकिन उनकी ये फिल्में आज भी डिप्रेशन और असफलता से जूझ रहे युवाओं के लिए एक उम्मीद की किरण हैं।
केदारनाथ और सोनचिरैया: वो रिस्क जो सिर्फ सुशांत ले सकते थे
कमर्शियल सिनेमा की चकाचौंध के बीच सुशांत ने ‘सोनचिरैया’ जैसी ऑफ-बीट फिल्म चुनी। बीहड़ के बागी का किरदार निभाना कोई आसान काम नहीं था, लेकिन उन्होंने उस चुनौती को भी स्वीकार किया। ‘केदारनाथ’ में एक पिट्ठू का किरदार निभाकर उन्होंने अपनी शारीरिक और भावनात्मक क्षमता का परिचय दिया। ये फिल्में बॉक्स ऑफिस के आंकड़ों से कहीं ऊपर हैं; ये सिनेमाई कला के नमूने हैं।

विरासत जो कभी नहीं मिटेगी
आज 2026 में, उनके जाने के कई साल बाद भी, सोशल मीडिया पर शायद ही कोई ऐसा दिन बीतता हो जब #SushantSinghRajput ट्रेंड न करता हो। ये उनके फैंस (SSRians) का प्यार ही है जो उन्हें हमारे बीच जिंदा रखे हुए है। उनका जाना हमें ये सिखा गया कि मानसिक स्वास्थ्य और अंदरूनी खुशी कितनी जरूरी है।
सुशांत सिंह राजपूत एक टूटता हुआ तारा नहीं थे जो गिरकर खत्म हो जाए; वो तो वो ध्रुव तारा हैं जो हमेशा अपनी जगह कायम रहेंगे। आज उनके 40वें जन्मदिन पर हम उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए बस यही कहेंगे—”तुम्हारी मुस्कान हमारे दिलों में हमेशा आबाद रहेगी। हैप्पी बर्थडे, सुशांत!”
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